तुम्हें गर याद ना कर लूँ – शिशिर मधुकर

तुम्हें गर याद ना कर लूँ मुझे न चैन आता हैदर्द सीने में उठता है मुझे हर पल सताता हैदेख के मेरी हालत को वो कई तंज़ कसते हैवही तो प्रेम समझेगा कहीं जो दिल लगाता है भले तुम दूर बैठे हो ना फिर नज़दीक आओगे ये मन तुमसे मिलन के पर सदा सपने सजाता है तुम्हें मालूम है ना तुम मेरे सीने की धड़कन होदीवाना हर घड़ी तब ही तुम्हें झुककर मनाता है अपनी तो तुम्हीं जानो ना जाने कैसे हँसते होदर्द ये हिज्र का सारा तन्हा मधुकर उठाता है शिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 26/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018
  2. Bhawana Kumari 26/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018
  3. डी. के. निवातिया 26/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018
  4. C.M. Sharma 29/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 29/10/2018
  5. kiran kapur gulati 23/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 23/11/2018
  6. rakesh kumar 23/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 23/11/2018
  7. विजय कुरकूरे 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 25/11/2018

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