दुकान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

इंसान को ठगने के लिए दुकान आ गयेउनकी दवा इनकी दुआ काम आ गये।नब्ज टटोल कर दवा देना भूल गये बैदव्यापार के लिए मर्ज के जाँच आ गये।नकली असली का कोई भरोसा नहींमिलावट में हर एक मकाम आ गये।सब को बड़े होने के सपने आने लगेकरने लगे गलत तो बुरे हाल हो गये।इंसान को दवा बताकर बेच रहे जहरगरीब के खून अमीरों के रास आ गये।जाँच एजेंसियाँ सारे हो रहे अब फेलचोर बजारी घूसखोरों के बाढ़ आ गये।जिधर देखना है देख लो नजर धुमाकरहर इक चीज पकड़ने के जाल आ गये।मरौअत कोई नहीं करता इस जमाने मेंमन में ना जाने कैसे अब पाप आ गये।पैसे कमा लेने के भी हद हो गये अबगरीब इस तरह से बेरोजगार हो गये।इंसानो से उनकी इंसानियत मत पूछोमारा मारी में जीने सबके मुहाल हो गये। शेरावत मुस्लिम जीना चाँदनी यूँ नदियाँ भेष विश्व आँखों कहाँ

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 26/10/2018
  2. C.M. Sharma 29/10/2018

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