आँसू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जान बूझ कर फंसा है तड़पने दीजियेप्यार किया है थोड़ा सा भटकने दीजिये।घाव जिंदा है नासूर बन जाने दीजियेकुछ समझा कुछ समझ जाने दीजिये।इसके होस उड़ेंगे वह भी पागल बनेगाबहार ए गुल खिला है अब महकने दीजिये ।ठोकर लगेगी होश ठिकाने आ जायेंगेबस में नहीं है अब उसे बहकने दीजिये।न चैन आयेगा ना नींद आयेगी उसेरास्ता बदल दिया है उलझने दीजिये।वफ़ा को थोड़ा और भी बेवफ़ा होने दोनफरातों से थोड़ा और लड़ने दीजिये।बैठकर रोयेगा उसके आँसू निकलेंगेशांत हो जायेगा घटा को छटने दीजिये।

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 26/10/2018
  2. C.M. Sharma 27/10/2018

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