निशान ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

दूरियां मुझको अब तुम जताने लगे होअपना संग वो अनोखा भुलाने लगे होतड़प कोई मिलने की दिखती नहीं अब खुद को महफिल से मेरी बचाने लगे होइस जहाँ में मुहब्बत ना तुम पाप समझोफिर ये अंखियां क्यों मुझसे चुराने लगे होकभी पल हिज्र का था ना तुमको गवारा अब पूरा बरस कैसे तन्हा बिताने लगे होये निशान ए मुहब्बत ना छूटेंगे हरगिज़ तुम मधुकर क्यों इनको मिटाने लगे हो शिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

7 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 25/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018
  2. Rinki Raut 26/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018
    • santosh singh 03/12/2018
  3. C.M. Sharma 27/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/10/2018

Leave a Reply