सपनो के शहर में आज धुंआ है|

कभी सिर्फ केमिस्ट्री लैब में सूंघी थी,
आज हवा में सूंघता हूँ,
हर पांच मील पर सल्फर,
चार मील पर सोडियम
और तीन मील पर अमोनिया है,
सीमेंट घुली है हवा में
सांस लेना दुश्वार हुआ है,
सपनो के शहर में आज धुआं ही धुंआ है|
 
कहने को घर के,
एक तरफ माउंटेन व्यू
और दूसरी तरफ सी व्यू है,
पर जब सुबह सवेरे पर्दा खोलो
तोह दिखता सिर्फ धुआं है,
पहाड़ गायब, समुद्र गायब
गायब शेहेर का सुन्हेरा चार्म है,
सिलेटी सी सुबह और सिलेटी सी शाम,
सपनो के शहर में आज धुआं ही धुंआ है|
 
इस धुंए की धुनी लगाये,
रोज़ की भागदौड़ में,
ज़हर के हज़ार कश लगा लेता हु,
पर मेरे सपनो का शहर,
समुद्र की लहर,
नीला आसमान,
जगमगाती राते,
चमचमाती सड़के.
और ऊँची ऊँची इमारते,
आज सब धुआं |
 
शिकायत नहीं, सच है,
सपनो के शहर में आज धुआं ही धुंआ है|

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  1. C.M. Sharma 25/10/2018

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