जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप में आती होकरे वंदना जो भी तेरी मनोकामना उसकी पूर्ण करती माँ सबके दु:खो को हरने वाली तुम नौ रुपों में आई हो ब्रह्मा,विष्णु,और महेश सब में तेरी शक्ति माँ कैसे करूँ स्वागत तेराखुद भंवरजाल में फंसी हूँ माँ कुछ भी नहीं मेरे पास में माँ क्या तुम्हें भोग लगाऊँ मैं जो रुखा सूखा पास मेरे तुझको वो भेंट चढ़ाऊँ माँ बस इतनी शक्ति मुझको दे दे माँँ हर मुसीबत से लड़ पाऊं मैं जब भटकूं मैं राह कभी भी माँ हाथ मेरा तू आ के थाम लेना माँ ।भावना कुमारी

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 12/10/2018
    • Bhawana Kumari 12/10/2018

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