बारिश हुई जब प्रेम की – शिशिर मधुकर

सोचे बिना ये इश्क मैंने तुमसे जो कर लियाअपने वीरान सपनों को तेरे रंग से भर लिया कोई नहीं है ऊँच नीच अब तेरे मेरे दरम्यानतेरी हर अदा को मैंने निज सर पे धर लिया तूने भी तो अपना करम कुछ इस तरह कियाखुद को मिटा हर गम मेरा चुटकी में हर लियाजब जब तू आ गई मेरी अंखियॊं के सामनेछवियां नज़र में भर तेरी मैं भी संवर लियाबारिश हुई जब प्रेम की सब मैल धुल गयाउदासी भरा चेहरा मेरा मधुकर निखर लिया शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. डी. के. निवातिया 10/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 10/10/2018
  2. C.M. Sharma 11/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/10/2018
  3. Bhawana Kumari 12/10/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/10/2018

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