यादें

कैसे बताऊँ मेरी यादें हैं कैसी,
खट्टी-मीठी हैं यादें मेरे जैसी..

चवन्नी के बेर सी
कहानियों के ढेर सी |
माँ की लोरी सी,
दूध की कटोरी सी |
बाबा की थपकी सी,
दोपहर की झपकी सी |
स्कूल में छुट्टी की घंटी सी,
गणित में भूली गिनती सी |

कैसे बताऊँ मेरी यादें हैं कैसी,
खट्टी-मीठी हैं यादें मेरे जैसी..

बचपन के लड़कपन सी,
जवानी के अल्हड़पन सी |
कैरम में जीती रानी सी,
परियों कि कहानी सी |
प्यार की पहली चिट्ठी सी,
बरसात की सौंधी मिटटी सी |
दूरदर्शन के छायागीत सी,
बस में पकड़ी सीट सी |

कैसे बताऊँ मेरी यादें हैं कैसी,
खट्टी-मीठी हैं यादें मेरे जैसी..

छत पे पतंगबाज़ी सी,
कॉलेज की रंगबाज़ी सी |
ब्लैक में खरीदी सिनेमा की टिकट सी,
आखिरी गेंद पर मिले विकेट सी |
बनारस के घाट सी,
दिल्ली के चाट सी |
खिलते हुए गुलाब सी,
ख़त्म न होते ख्वाब सी |

कैसे बताऊँ मेरी यादें हैं कैसी,
खट्टी-मीठी हैं यादें मेरे जैसी..

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया 10/10/2018
    • Garima Mishra 12/10/2018
  2. C.M. Sharma 11/10/2018
    • Garima Mishra 12/10/2018
  3. Subash 24/03/2019

Leave a Reply