लेकिन सीमा होती है ……..

माना कि संस्कार तुम्हाराविवेक कभी न खोना हैकोई कितना कड़वा बोलेकाम मगर सह जाना है

लेकिन भैया कब तक ऐसेआँख मूंदकर बैठोगेअधिकार अपने हिस्से कागैरों को फोकट बाँटोगे

बंदर सारे उछल उछल करतुमको आँख दिखाते हैहक छीन कर आज तुम्हारातुमको बोल सुनाते है

माना अपना दिल बड़ा होलेकिन सीमा होती हैकिस काम की ये जिंदगीसब कुछ सह कर रोती है—————-//**–शशिकांत शांडिले, नागपुरभ्र.९९७५९९५४५०

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15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 03/10/2018
  2. C.M. Sharma 04/10/2018
  3. Bindeshwar Prasad sharma 04/10/2018
  4. arun kumar jha 04/10/2018
  5. Rinki Raut 16/10/2018
  6. कल्पना 29/10/2018
  7. mani 14/11/2018

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