लिख नहीं पाता हूँ – डी के निवातिया

लिख नहीं पाता हूँ
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लिखना चाहता हूँपर लिख नहीं पाता हूँआँखों के सामने तैरतेकुछ ख्वाब,कुछ अनकहे अल्फ़ाज़आते है क्षण भर के लिएफिर गुम जाते हैसहेज कर किसी तरहउनको रखना चाहता हूँलिखना चाहता हूँपर लिख नहीं पाता हूँ !!!कभी कभारयूँ बैठे बैठे हीया फिर चलते चलतेजगने लगते है हैकुछ मनोभावस्पंदन करते हुएधुंधला जाते हैजब तक बांधता हूँकलम के तार मेंकही दूर निकल जाते हैऔर फिर ..वही…….!ठगा सा रह जाता हूँ !!लिखना चाहता हूँपर लिख नहीं पाता हूँ !!
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कितना सरललगता है सबकोकुछ लिख पानाकवित्त भावह्रदय जगा पानाहै उतना ही कठिनमगर कार्य यहबड़ा ही असाधारणकोशिश करके भीहार जाता हूँबारम्बार ..नहीं कर पाता हूँलिखना चाहता हूँपर लिख नहीं पाता हूँ !!
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स्वरचित :- डी के निवातिया

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10 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
  4. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 19/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018

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