भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता हैतेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता हैकितना भी कोई संयम रख ले दर्द तो दिल में होता है पीर बढे जब हद से ज्यादा उसको तो कहना पड़ता है कितनी सूरत मिलती हैं इस नदिया को निज जीवन मेंइसके जल को लेकिन फिर भी हरदम बहना पड़ता हैकितना भी कोई गर्व करें सब कुछ नश्वर है जीवन मेंइंसानी हस्ती को इस जग में एक दिन ढहना पड़ता हैभाग्य ना कोई बांच सका है मधुकर इंसा का धरती पर जो भी किस्मत से मिलता है बस वो ही गहना पड़ता है शिशिर मधु

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8 Comments

  1. डी. के. निवातिया 18/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  2. Anjali yadav 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  3. C.M. Sharma 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  4. Arun Kant Shukla 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018

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