गैर हम हो नहीं सकते – शिशिर मधुकर

कोई परदा नहीं जब बीच गैर हम हो नहीं सकतेकिसी और की बाहों में अब तुम सो नहीं सकते बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दौलतें प्रेम की जग में कोई कीमत लगाओ अब इसे हम खो नहीं सकते मुहब्बत में खुदा एक दूजे को हम ने बनाया हैकोई नफ़रत के बीज बीच में हम बो नहीं सकते पीर सीने में जो उठती है तुम कहाँ देख पाओगेदिखा के इस ज़माने को कभी हम रो नहीं सकतेबना के गर्व का टीका तुम्हें मस्तक सजाया है किसी भी हाल में मधुकर इसे हम धो नहीं सकतेशिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. अंजली यादव 18/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 18/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  3. डी. के. निवातिया 18/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  4. C.M. Sharma 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  5. Arun Kant Shukla 19/09/2018
  6. Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  7. राजू चक्रवर्ती 14/08/2019
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2019

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