कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पायातुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पायाहवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया सारा इनका रुख मोड़ ना पाया एक बिजली गिरी ऐसी साझा रस्ता उजाडा है बिछडी राहों को मैं फिर से संग में जोड़ ना पायाभले दुःख सह लिए मैंने ना तुझको चोट आने दीतेरी नाजुक कलाई खुदगर्ज हो मैं मरोड़ ना पायाकोई बंधन नहीं टूटा तन्हाई फिर से डसती हैप्रेम मधुकर तू ही उसपे ये सब निचोड़ ना पायाशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. Anjali yadav 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2018
  2. C.M. Sharma 20/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/09/2018

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