हीर हो तुम – शिशिर मधुकर

डर तुम्हारे फिर से चलो अब सभी दूर हो गएनज़दीक आने को तुम भी लो मज़बूर हो गएमुझे पहचानते हो बस यही तुमने बताया थाएक बार फिर एक दूजे का हम गुरूर हो गएगुमनामी सी छा गई थी तेरा साथ जब छुटाआ गए हो तुम लो फिर हम मशहूर हो गए घाव जो मिले थे सनम मुहब्बत में मुझे तेरी उनमें से से कई तो तू देख ले नासूर हो गए हीर हो तुम मधुकर जिसे खुद की नहीं परख कितने तुम्हें अपना समझ यहाँ मगरूर हो गए शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 12/09/2018
  2. Shishir "Madhukar" 12/09/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 12/09/2018

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