देख के तेरी सूरत – शिशिर मधुकर

मेरे जीवन में जब जब भी घोर निराशा छाती हैदेख के तेरी सूरत फिर जीने की इच्छा आती हैबिंधा हुआ है दिल ये मेरा दुनिया भर के तीरों सेएक बात तेरी ही जमी हुईं बर्फ सर्द पिघलाती हैनीरसता जीवन में छाई कोई मिलन को ना तरसे लाखो गुल खिल जाते हैं जैसे ही तू मुस्कुराती हैऊब चुके हैं कान ये मेरे सुन के स्वार्थ की आवाजें घुल जाती है मिश्री इनमें जब गीत कोई तू गाती हैटूटते हैं इंसान वहाँ पर प्रीत जहाँ पर नकली है आंसू भी ऐसे लोगों का मधुकर अक्सर बरसाती हैशिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 10/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2018
  2. ANU MAHESHWARI 10/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2018
  3. mukta 10/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/09/2018
  4. C.M. Sharma 11/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/09/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 12/09/2018
  6. Bhawana Kumari 15/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 16/09/2018

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