मेरे अल्फाज़ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पत्थर को पुजते – पुजते लोग क्यों पत्थर बन गयेएक – दूसरे को नहीं समझते इतने बत्तर बन गये।कहाँ गयी वो शर्म – हया जो अपने दिल में रहते थेइंसानियत मर गयी खाकी – खादी खद्दर बन गये।

 रहम की भीख भी अब मुकर्रर नहीं होता जमाने मेंलोग कब से पीछे पड़े हैं सिर्फ पैसा कमाने में।कर्म – धर्म और मर्म सब के सब रख दिए ताक परकोई भी रहनुमा अब नहीं मिलता यहाँ जमाने में। बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दुबाढ़ – पटना9661065930

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 10/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
  2. डी. के. निवातिया 10/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
  3. ANU MAHESHWARI 10/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
  4. mukta 10/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018
  5. C.M. Sharma 11/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/09/2018

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