कृपानिधान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

तेरी शरण में आये हैं हम, हे कृपा निधानहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।नहीं चाहिए हाथी घोड़ा, न अपनी पहचानभर जाए बस पेट हमारा, बची रहे ये जान।रीति – रिवाज इस जीवन का, विधाता विधि – विधानहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।बता दो इतना कि बस, अपना धर्म ही याद रहेघर अपना जैसे , उन सब का घर आवाद रहे।फर्क नहीं होता ऐसे, गीता कभी कुरआनहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।एक नजर तुम फेरोगे जो , यह सोना माटी हैमौत नजर आयेगी सब को , गहरी घाटी हैइतना तो जाने सब कोई, समझे सकल जहानहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।यहीं जीना यहीं मर जाना, इतना याद रहेहर मानव मानव से ही, ये बस आजाद रहे।करते रहें प्रभू को मिलकर, हम इतना गुणगानहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।इतना तो कर दो राघव, सबका दिल उदार रहेइतनी भक्ति दे दो कि , एक – दूजे में प्यार रहेगा।सेवा भक्ति हमें सिखा दो, इतना दे दो ज्ञानहमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान।बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दुबाढ़ – पटना9661065930

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2 Comments

  1. mukta 07/09/2018

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