तुम्हे कैसे बताऊँ

बहुत कुछ है कहने कोपर क्या कहूँकुछ समझ नहीं पाऊँमैं चातक,तुम्हारी चाहत मेंकितना तड़पता हूँआखिर तुम्हे कैसे बताऊँयाचक बन कर तुम्हारे प्रेम की याचनातुमसे कैसे कर पाऊँतुम्हे देखने की जिद पाल रखी है मेरी आँखों नेइसे और क्या दिखाऊँपता नहीं भीतरक्या सुलग रहा हैतुम्हीं बताओ नाइसे कैसे बुझाऊँएक दरिया बह रहा है जो मुझे बहा ले जाना चाहता हैतुम बताओ नाकैसे खुद को बहने से रोक पाऊँये सावन भी बीत रहा हैतुम्हीं बताओ नाये सावन तुम्हारे बिन कैसे बिताऊँअब जीवन में बसती हो तुमतुम्हीं बताओ नातुम्हारे बिना कैसे जी पाऊँ—अभिषेक राजहंस

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6 Comments

  1. Saviakna 04/09/2018
  2. Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  3. Bhawana Kumari 05/09/2018
  4. C.M. Sharma 05/09/2018
  5. davendra87 05/09/2018
  6. ANU MAHESHWARI 05/09/2018

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