डोर ये स्नेह की – शिशिर मधुकर

कभी तुम भूल जाते हो कभी पहलू में आते हो आखिर कौन से रिश्ते को तुम मुझसे निभाते होकभी तुमको नहीं परवाह मुझे सन्देश देते होकभी मैं प्यार तेरा हूँ यही खुलकर जताते होकभी ऐंठें से रहते हो जैसे कुछ भी नहीं मेरे कभी बातों से मीठी तुम मुझे अपनी लुभाते होअरे गर दूरियां हीं अब तुम्हें मुझसे बनानी हैंबांध कर डोर ये स्नेह की क्यों मुझको सताते होबड़ी मुश्किल से उल्फ़त की दिलों में आग बुझती हैइसे तुम मुस्कुरा मधुकर के दिल में क्यों जलाते होशिशिर मधुकर

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9 Comments

  1. Bhawana Kumari 05/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  2. ANU MAHESHWARI 05/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/09/2018
  3. Harish Chamoli 06/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/09/2018
  4. Harish Chamoli 06/09/2018
  5. C.M. Sharma 06/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/09/2018

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