रूठा वक़्त

गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें,सिलसिलो के रुख बदल ना सकेगें। ये आइने भी कभी दिल नही पढते,और हम आइने कभी पलट न सकेगे।।गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें।। महज़ कुछ बातों को तो उतार दिया,कभी आँखो के दरिया को उतार न सकेगे। ।राहें भी हमारी है, मंजिलें भी हमारी है, फिर भी मुसाफ़िर इनके बन ना सकेगें।गिले इन लबों के खत्म ना कर सकेगें।आँखे के साथ वक़्त भी साथ है,फिर भी अपने ही खवाबों के हक़दार हम हो न सकेगें।। अजंली

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13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 04/09/2018
    • Anjali yadav 04/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 04/09/2018
  3. Anjali yadav 04/09/2018
  4. Saviakna 04/09/2018
    • Anjali yadav 05/09/2018
  5. Bhawana Kumari 05/09/2018
    • Anjali yadav 05/09/2018
  6. C.M. Sharma 05/09/2018
    • Anjali yadav 05/09/2018
  7. ANU MAHESHWARI 06/09/2018
    • AnjalI yadav 18/09/2018
  8. Inder Bhole Nath 25/09/2018

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