बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दो

बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दोहम नन्हे सत्पथ के राहीसत्पथ का साहस संबल दोचक्षु पटल के बाहर भीतरअच्छाई देखे हम हर पल ।मुख से सत्य वचन ही निकलेकानो में स्वर गूंजे सच के ।बुरे कहीं भी नजर न आयेअच्छे को इतना फैलाये ।बुरी नही है कोई स्थितिअच्छाई की है अनुपस्थिति।है केवल इक दीप जलानाअंधकार को है मिट जाना। तेरी बात समझ मे आती सत्याग्रह का मर्म बताती।पुष्प अहिंसा के खिल जाएंजीवन महके और महकाये।बापू जग की माया काहमको भी अभिनव दर्पण दोसत्य प्रतिष्ठित कर पाए हमदृढ़ संकल्प समर्पण दो।-देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 03/09/2018
  2. Bhawana Kumari 04/09/2018
  3. C.M. Sharma 04/09/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 04/09/2018

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