तड़पती हूँ मगर – शिशिर मधुकर

सुनो नाराज़ ना होना मैं तुमको याद करती हूँनज़र से दूर लोगों की सदा आहें सी भरती हूँबड़ा बैरी ज़माना है कहीं रुसवाई ना कर देतड़पती हूँ मगर सच यही कहने से डरती हूँभले तुम दूर रहते हो और मिलते नहीं मुझसेछवि वो तेरी प्यारी सी सदा सीने में धरती हूँ गर मुझसे मिलन को टूटते हो तुम अकेले आजतन्हा गलियों से देख तेरे बिन मैं भी गुजरती हूँये तेरे प्रेम का ही तो असर बाकी है मुझपे आजदेख के आईने में खुद को मैं मधुकर संवरती हूँ शिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  2. davendra87 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  3. Saviakna 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  4. Bhawana Kumari 05/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  5. C.M. Sharma 05/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 05/09/2018
  6. ANU MAHESHWARI 05/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/09/2018
  7. Inder Bhole Nath 25/09/2018
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2018

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