प्रेम अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं तुमसे बात करता हूँ तभी अरमान जगते हैंतेरे ये बोल जाने क्यूं असल अमृत से लगते हैंतेरे नैनॊं का ये जादू होंठों की सुर्ख सी लाली मुझे बेचैन कर कर के मेरी नींदों को ठगते हैं मुझे तुमसे मुहब्बत सी सदा महसूस होती है मेरी सांसों में देखो तो कितने शोले सुलगते हैंप्रेम किस्मत से होता है नियम इसमें नही कोईसवाल ऐसे रिश्तों पे कभी मुझसे ना दगते हैं समर्पण जब नहीं होता किसी रिश्ते में भीतर से लाख चाहा करो मधुकर प्रेम अंकुर ना उगते हैं शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 31/08/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2018

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