ना रोको मुझे अब जाने दो

टूट गए सब नेह के नातेटूट गया विश्वासअर्थ नही फिर जीवन काना बाकी कोई आसअब पीड़ा को अपनाने दोना रोको मुझे अब जाने दोदीप जलाया जो दुख कारोशन है पीड़ा का आंगनअब दर्द लिखूं या दीप लिखूंब्याकुल मन की है ये उलझनइस उलझन को सुलझाने दोना रोको मुझे अब जाने दोमंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में नही मिले भगवानजिसने सच्ची राह दिखाईवो झूठा इंसानअब अंतर्मन को जगाने दोना रोको मुझे अब जाने दो।अंतर्मन पर मन भारी हैयह कैसा अज्ञानबांध सकूं निज मन का विप्लवदया करो हे दयानिधानमेरा मुझको हो जाने दोना रोको मुझे अब जाने दो।-देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 30/08/2018
  2. Shishir "Madhukar" 30/08/2018
  3. davendra87 30/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2018
  4. C.M. Sharma 31/08/2018
  5. Bhawana Kumari 03/09/2018

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