अपने खास लगते हो – शिशिर मधुकर

कभी तुम दूर लगते हो कभी तुम पास लगते होहर क्षण मगर मुझको तुम अपने खास लगते होज़माना दौड़ता है हर तरफ़ पर इंसान तन्हा हैतुम ऐसे दौर में मुझको हसीं एहसास लगते हो जिसका आनंद पाने को तरसती रहती है दुनिया मुझे कान्हा का तुम वो ही तो महा रास लगते होयूँ तो ये ज़िंदगी इंसान की ऋतुओं का संगम हैमगर तुम साथ में मुझको बसंती मास लगते होमेरी बांहो में आकर जब मुझे तुम घेर लेते हो अपनी पूरी हुईं मधुकर मुझे अरदास लगते हो शिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. Rajeev Gupta 28/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/08/2018
  2. ANU MAHESHWARI 28/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/08/2018
  3. Rajeev Gupta 29/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2018
  4. C.M. Sharma 31/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2018

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