आज उनसे मुलाकात बांकी है

ऐ लम्हे कुछ देर और ठहर जा ना तूदेख आज मेरे वक़्त का हिसाब ना करआज उनसे मेरी मुलाकात बांकी हैअभी-अभी तो तारो ने चमकना शुरू किया हैअभी मेरे चाँद का चमकना अभी बांकी हैंतू खामखाह बैर मत पाल ना मुझसेतू जरा धीरे-धीरे जा नाअभी अभी तो शुरू किया हैउनकी नजरो से नजरे मिलानाअभी उनके केशो में उंगलिया फिराना बांकी हैथोडा और घुलने दे ना चीनी कोचाय की केतली मेंअभी तो लबो से चुस्कियाँ लेना बांकी हैदेख अभी भी जल रही है मोमउसे जरा पिघलने तो दें नाआज उनसे मेरी बात बांकी हैदिल में जो कैद है जज्बात आज उनका आजाद होना बांकी है–अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/08/2018

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