तुम (भाग 2 )

जीवन की नयी उमंग सी तुमबिन फूलो की भी बसंत हो तुममधुशाला की मदिरा पड़ जाये फीकीमदहोशी की वो भरमार हो तुम … कभी धूप में कुम्लाई सी तुमकभी बरखा सी खिलखिलाई वो तुमभूले हुए बरसो हुए जिसेवो पायल की झंकार हो तुम….. प्यार की मधुर सिसकार सी तुममेरी अधूरी तलाश हो तुमकुदरत ने जिसे किया कबूलबिन मांगी वो दुआ हो तुम……. मेरी सांस का अब एहसास हो तुमझरते नयनो की प्यास हो तुमभीगे पंखो की अब परवाह नहींमेरे सपनो की नयी उड़ान हो तुम …..

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/08/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/08/2018

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