यूं ही

हर पल एक नया इम्तिहान लेके आया हैवक़्त ठोकरों भरा इनाम लेके आया हैकदम रुक जाएंगे ऐसी तो कोई बात नही हैहर मोड़ पर मंजिलों का पैगाम लेके आया है।अब सोचता हूँ शर्म से नजरें झुकाये क्यों चलूँइसी राह पर चलने का जब फरमान लेके आया है।इस धूप की बिसात क्या मंजर जला सकेसहराओं में बारिश का इंतजाम लेके आया है। **********चाँद तारों की तरह फिर कोई तस्वीर हो जायेतेरी तकदीर से रोशन मेरी तकदीर हो जाये।मैं तेरे वास्ते जिऊँ तू मेरे वास्ते जियेजिंदगी प्यार की लिखी हुई तहरीर हो जाये । ***********ये चाहते हैं सब कि उसको भूल जाऊं मैं मगरभूल कर उसको मैं खुद को याद भी कैसे रखूँ ।उस हसरते गुलफाम की मंजिल नही मै,जानता हूँवो नही मेरी नजर में,ये मगर कैसे कहूँ।मुश्किलें ही बख्सी है इस जहां की रहमतों नेछोड़ कर तन्हा उसे किसी राह पर कैसे चलूं। ***********देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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  1. Shishir "Madhukar" 22/08/2018

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