युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी….

“बेनकाब चेहरे हैं,दाग बड़े गहरे हैं,टूटता तिलस्म,आज सच से भय खाता हूँ ।गीत नही गाता हूँ “(श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी)सच में तुमने तिलिस्म तोड़ दिया है….सब नेताओं को बेनकाब किया है….नैतिकता की परिभाषा गढ़ कर….राज धरम पालन इतिहास रचा है….छल कपट भाया न जिसे था…राजनीति का ऐसा सरमाया था…कवी वाणी जब मुखरित होती….मंत्रमुग्ध हो सारी दुनिया सुनती….पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर था वो…देश हित में जीता मरता था वो….कहाँ मिलते हैं नेता अब ऐसे….इंसानियत का प्रणेता था वो….सरल सरस मुख नयन भाषा…अटल सत्य परिभाषित गाथा…स्तम्भ अटल राजनीत धर्म का…ज्योतिपुंज विकट प्रस्थिति का…कंठ सरस्वती विराजे जिसके….निर्मल वाणी मुख सरिता बिहसे…मुख बिम्बित हो चमके ऐसे…शीतल चन्दर प्रत्यक्ष हो जैसे….प्रेमराग अनुरागी मन था उसका….सर्वधर्म समभाव मन था उसका….सोच विलक्षण हंसमुख हर क्षण…अटल चुंबकीय आकर्षण उसका….हर जन ह्रदय में रहता था वो….आशा विश्वास का दीपक था वो…सार्वभौम सत्य ही कहता था वो…फिर भी अजातशत्रु नेता था वो….भीष्म सा अटल उसका जीवन था….गौधूलि का समय पवित्र चुना था…नया आवरण लिया उसने पहन था…’अटल’ अमर ज्योत विलीन हुआ था…शत शत नमन है भारत रतन को….शत शत नमन सबके ‘अटल’ नेता को….\/ सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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5 Comments

  1. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 17/08/2018
  2. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 17/08/2018
  3. Shishir "Madhukar" 18/08/2018
  4. Anjali yadav 18/08/2018
  5. Rajeev Gupta 22/08/2018

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