बता भी दीजिये

जो भी है दिल में जज्बात आपकेआज बता भी दीजियेअफ़साने गा केसुना भी दीजियेआँचल अपनेइस सावन में भींगा भी दीजियेतस्वीर बन के जो रह गयी हैआईने को अपना अक्शदिखा भी दीजियेचुपके से छत पर बुला भी लीजियेजुल्फों के बादल कोउड़ा भी दीजियेसुर्ख गुलाब की पंखुडियो जैसे लबो परलबो को टकरा भी लीजियेमोम बेचारी यूँ ही पिघल रहीफूँक मार कर बुझा भी दीजियेदिल के ख़त का पताबता भी दीजियेदरवाजे की कुण्डीसरका भी लीजियेजो भी है दिल मेंआज बता भी दीजिये–अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" 19/08/2018

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