एक दीया मैं भी उनकी याद में

गीत गर्दन चढाने वालों केआज गुनगुना रहा हूँएक दीया मैं भी उनकीयाद में जला रहा हूँ |जगा रहा हूँ किआहूतिदी जिन्होंने प्राण कीआज उनकी आरजूओं कीआग तुमको दिखा रहा हूँ |एक दीया मैं भी उनकीयाद में जला रहा हूँ |बांधकर जो बाजुओं परभरोसा चढ़ गये हिमालयआज उन दीवानों की मोहब्बत तुमसे मैं जता रहा हूँ |एक दीया मैं भी उनकीयाद में जला रहा हूँ |वो थे कि जिनकी गोद मेंसिर्फ थी माटी की ममताउनके बिखरे खून कोमैं सतरंगी बना रहा हूँ |एक दीया मैं भी उनकीयाद में जला रहा हूँ |छोड़ गये जो ये धरा उज्ज्वलये गगन और उजला सवेरामाटी से उठाकर उनकोमस्तक गले लगा रहा हूँ |एक दीया मैं भी उनकीयाद में जला रहा हूँ |

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7 Comments

  1. अंजली यादव Anjali yadav 14/08/2018
  2. rakesh kumar rakesh kumar 15/08/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/08/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/08/2018
  5. rakesh kumar Rakesh kumar 23/08/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2018
  7. rakesh kumar Rakesh Kumar 12/08/2019

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