पंद्रह अगस्त

बिन मान बने मेहमानों कोअपने घर से जब किया विदाउन्मुक्त-गगन,स्वछन्द-धरास्वाधीन -मेखला हुई यदाजिसमें न सूर्य कभी डूबाउसका जब सूरज हुआ अस्तआया स्वर्णिम पंद्रह अगस्त टूटी बेड़ी भारत-माँ कीमच गया जगत में कोलाहलसाम्राज्य-अटल हिल उठे देखकरसत्य-अहिंसा का सम्बलऐसे अद्भुत शास्त्रों द्वाराबंधन-समस्त जब हुए ध्वस्तआया स्वर्णिम पंद्रह अगस्त (जंगे) आजादी की क़ुरबानीहै आज मुक्त-स्वर से गानीइस अटल-तिरंगे के नीचेदुहरानी है फिर यह-वाणीएक रहे थे,एक रहे हैं,एक रहेंगे सभी सततआया स्वर्णिम पन्दरह अगस्त बापू द्वारा जो पथ-प्रशस्तउस पुण्य-मार्ग पर चलो चलेंआजादी की शुभ-वेला परआओ मंगल-कामना करेंयह देश फले-फूले सदैवइसके वासी हों सुखी-स्वस्थआया स्वर्णिम पंद्रह अगस्त

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  1. C.M. Sharma 16/08/2018

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