दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

देखो मेघा घिर गया, ये बादल के साथबूंद – बूंद अब झर रहा, मौशम का सौगात।गाँव – शहर सब भर गये, नदियाँ करे उफानत्राहि – त्राहि अब मच रही, हुए देख हैरान।किसान ऐसे मर रहा, कब सूखा कब बाढ़नहीं पता अब चल रहा, कब सावन आषाढ़।मौशम के अब मार से, रह जाते सब दंगगरीब बेचारा क्या करे, आफत रहती संग।

बादल भी आकाश में, उमड़ – घुमड़ इतरायसूढ समंदर में करे, भर – भर पानी लाय।

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3 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 09/08/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/08/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/08/2018

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