मै पुरुष हूँ-Bhawana kumari

हाँ मैं एक पुरुष हूँ बेटा,भाई,पति पिता सब कुछ तो हूँ। मेरे अंदर भी दर्द है मैं भी टुटता हूँ मैं भी रोता हूँ मुश्किलों में घबराता हूँ। पर किसी को दिखलाता नही हूँ। कभी ले लिया मां का पक्ष तो माँ का बेटा कहलाता हूँ कभी लिया पत्नी का पक्ष तो जोरू का गुलाम कहलाता हूँ। मेरे अंदर कितनी कसमकस है मैं व्यक्त नही कर पाता हूँ जब मां मुुझसे कुछ उम्मीद करती है उसे पूरा नहीं कर पाता हूँमुझे बुरा लगता है उसे बतला ही पाता हूँ। जब पत्नी को मेरेसाथ की जरूरत होती है मैं उसका साथ नही दे पाता हूँ (संयुक्त परिवार या नौकरी या किसी कारणवश )मैं उससे कहना चाहता हूँ मैं तुम्हारे साथ हूँ पर कह नही पाता हूँ। जब मेरे बच्चे बीमार होते है मैं भी चिंतित होता हूँ पर अपनीचिंता दिखला नही पता हूँ। मैं भी दर्द में कहराता हूँपूरी तरह से टूट जाता हूँ पर किसी को बतलाता नही हूँ। क्यूंकि मैं पुरुष हूँ मुझे अपनी भावना व्यक्त करना नही आता मुझे उसने(भगवान)इतना कठोर बनाया है मैं अपना दर्द सारे जमाने से छुपाता हूँ। क्यूंकि मैं एक पुरुष हूँ।

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12 Comments

  1. C.M. Sharma 08/08/2018
    • Bhawana Kumari 08/08/2018
  2. Shishir "Madhukar" 08/08/2018
    • Bhawana Kumari 08/08/2018
  3. डी. के. निवातिया 08/08/2018
    • Bhawana Kumari 08/08/2018
  4. raquimali 09/08/2018
    • Bhawana Kumari 09/08/2018
  5. Rajeev Gupta 11/08/2018
    • Bhawana Kumari 11/08/2018
  6. rakesh kumar 31/08/2018
    • Bhawana Kumari 04/09/2018

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