उलझा हुआ वो भी – अनु महेश्वरि

पुरुष शक्तिशाली या नारी,कोन किसपे परे है भारी,ये बहस तो चलती आयी है,सदियों तक चलती भी रहेगी।मेरा अनुभव तो कहता है,पुरुष भी मन से कोमल होते,अपने हर रिश्ते को है निभाते।एक भाई के रूप में पाया,अपनी बहन का ख्याल रखते हुए,उसकी हर इच्छा का मान रखते हुए।पिता के रूप में पाया,अपनी बेटी को लाड़ लड़ाते हुए,बेटी की विदाई पे छुप छुप के रोत हुए,बाहर से शक्त है ख़ुदको दिखाते,इतनी भी हिम्मत नही कर पाते,किसी के सामने दो आँसू बहादे।प्रेमी के रूप में पाया,अपनी विवशता से झुझते हुए,माँ और पत्नी के बीच,बेटे या पति का फर्ज कैसे निभायेये वह कभी न जान पाये,कभी जोरू का गुलाम कहलाते,तो कभी माँ के हाथों का खिलौना बन जाते।कभी है वो पालनहार,कभी है वो सलाहकार,हर मुश्किल घड़ी में,किसी न किसी रूप में,मिलता उनका सहयोग है।एक ही साथ उसे भी,बहुत सारी भूमिकाएं निभानी पड़ती।भाई, पिता, बेटा, दोस्त, और न जाने क्या क्या,उलझा हुआ वो भी है रिश्तो के जाल में।फिर भी बाहर से शक्त ख़ुदको दिखाते,किसी के सामने जल्दी से अपना हाल नही सुनाते। अनु महेश्वरी

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10 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/08/2018
    • ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 07/08/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2018
    • ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 07/08/2018
  3. rakesh kumar Rakesh kumar 08/08/2018
    • ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 08/08/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/08/2018
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/08/2018
  5. raquimali raquimali 09/08/2018
  6. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 10/08/2018

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