अपने से लगते हो – शिशिर मधुकर

मुझे हर एक पल तुम यहाँ, अपने से लगते होमेरे नैनॊं ने जो देखा उसी, सपने से लगते होयहाँ तुम भी अधूरे हो, मुझे एहसास होता हैमुझे आगोश में लेते ही, तड़पने से लगते होतुमको देख के खुद का, मेरे पे बस नही रहताअमिट छवि से तुम सीने में, छपने से लगते होनाम लेता हूँ जो तेरा, दोस्त ये मुझसे कहते है किस देवता का नाम तुम, जपने से लगते होजुदाई मुझको ही मधुकर, परेशां ना करती है आलम ए हिज्र में तुम भी तो, तपने से लगते हो शिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. Rajeev Gupta 02/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 03/08/2018
  2. C.M. Sharma 03/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 03/08/2018
  3. डी. के. निवातिया 03/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 03/08/2018
  4. ANU MAHESHWARI 08/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 08/08/2018

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