बरसते हैं जो सावन से- शिशिर मधुकर

किसी को दिल की गहराई से गर हम प्यार करते हैंकद्र उसकी तमन्नाओं की फिर तो हर बार करते हैंखास रिश्तों की दुनिया में जो दिल की नहीं सुनतेमुहब्बत का महज़ वो तो यहाँ व्यापार करते हैंजिन्हें हरदम गुमा होता है खुद की सोच पर ज्यादामुहब्बत में वो साथी को बड़ा लाचार करते हैंप्रीत जिनके लिए बंधन नहीं जीने का ज़रिया है वो तो हर पल आँख मूंदे हुए ऐतबार करते हैंबरसते हैं जो सावन से तपन हर कण की हरने को वो ही मधुकर हरा इस बगिया का संसार करते हैंशिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 29/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  2. C.M. Sharma 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  3. Rajeev Gupta 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  4. डी. के. निवातिया 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018

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