खेल ये कैसे – शिशिर मधुकर

अँधेरा जब किसी इंसान के जीवन में आया हैतन्हा चलना पड़ा है साथ में रहता ना साया हैबड़ी मजबूरियों में रोशनी बिन उम्र गुजरी हैसफ़र ये ज़िंदगी का देख लो मैंने निभाया हैमुफलिसी दौर ऐसा है सभी पीछा छुड़ाते है अमीरों ने तो ऐसे वक्त में भी दिल दुखाया हैखुदाया खेल ये कैसे समझ आते नहीं मुझको वही तो मौज लेता है जिसने सबको सताया है परेशां शख्स वो हर एक है मधुकर जहाँ में आज जिसने अपना समझ के बोझ दूजों का उठाया है शिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. Bhawana Kumari 27/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/07/2018
  2. Rajeev Gupta 28/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/07/2018
  3. ANU MAHESHWARI 29/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  4. C.M. Sharma 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018

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