कोई धागा नहीं पिरता – शिशिर मधुकर

कैसे कह दूँ प्यार मैं तुमसे नहीं करताघाव ये दिल का मेरे कब से नहीं भरताहाथ तुम ना छोड़ते फिर ये नहीं होताज़िंदगी की राहों में मैं भी नहीं गिरता जोत जो इस प्रेम की मद्धम नहीं होतीइन अँधेरों में कभी मैं भी नहीं घिरतामुझको भी अपना अगर कोई बना लेतायूँ तन्हा टूटा हुआ मैं भी नहीं फिरताइस कदर बिखरे हैं मोती हार के अब तोजोड़ने को मधुकर कोई धागा नहीं पिरताशिशिर मधुकर

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10 Comments

  1. Bhawana Kumari 26/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/07/2018
  2. davendra87 28/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/07/2018
  3. Rajeev Gupta 28/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/07/2018
  4. ANU MAHESHWARI 29/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018
  5. C.M. Sharma 30/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2018

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