कांटे क्यों बो गए – शिशिर मधुकर

मैं तो यहाँ उदास हूँ तुम कैसे सो गए मुझको भुला के कौन सी दुनिया में खो गएफूलों की आस तो मेरी पूरी ना हो सकी मेरे सफ़र में तुम मगर कांटे क्यों बो गएसीने में दर्द है मगर आंसू नहीं हैं आजसारी नमी को नैन मेरे तन्हा ही रो गएजाना था दूर इस तरह दिल में क्यों बस गएतुमने कहा था तुम यहाँ बस मेरे हो गएसाया तुम्हें तो मिल गया तूफां के बीच में बादल मुझे तो पर यहाँ पूरा भिगो गएसारा कसूर थोप दिया सर पे मेरे तो आजतुम तो बड़ी सफाई से कर अपने धो गएअब वो समय ना आएगा खुल के जो हँस पडेंदिन वो हसीं बहार के मधुकर सुनो गएशिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

6 Comments

  1. C.M. Sharma 24/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2018
  2. डी. के. निवातिया 25/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 25/07/2018
  3. Bhawana Kumari 26/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/07/2018

Leave a Reply