विधा : कहमुक़री

सुबह शाम   मैं   उसे   रिझाऊँनैन पलक पर  जिसे    बिठाऊँबिन  उसके   दिल    है  बेहालक्यों सखि साजन?ना गोपाल

घड़ी – घड़ी   मैं   राह   निहारूँसुबह  शाम  नित  उसे पुकारूँदरस    बिना,  जीवन   बेकारक्यों सखि साजन,न  करतार

जा   कारे   के    हम     दीवानेकर   डारै     बा     नै     बेगानेछोड़ गयो,ज्यूँ  रह्यो  न कामका सखि साजन,न घनश्याम

दूर   रहे   नहीं  पास   वो आयेफिर  भी   मेरे  दिल  को भायेधवल   रूप,  नैनों     में    शेषका सखि प्रीतम, नहीं   राकेश

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/07/2018

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