मुझे तुझमे समाना है – शिशिर मधुकर

घने बादल बरसते हैं हुआ मौसम सुहाना है कहाँ पे छुप गए चंदा तुम्हें बाहों में आना हैबदन पे हो रही वर्षा कुछ ऐसी मार करती है जिससे हो रही पीड़ाएं बस तुमको बताना हैसुनाते हैं जो ये दरिया और उफनें हुए झरनें वही तो राग मस्ती का सुनो तुमको सुनाना हैधूल सी हट गई जैसे जवां कलियों के माथे सेवही निखरा हुआ चेहरा तो तुमको दिखाना हैएक बारी जतन करके मेरे नज़दीक तो आओमिटा के अपनी हस्ती को मुझे तुम में समाना हैशिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. Madhu tiwari 23/07/2018
  2. Shishir "Madhukar" 24/07/2018
  3. C.M. Sharma 24/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2018
  4. डी. के. निवातिया 25/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 25/07/2018
  5. Bhawana Kumari 26/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/07/2018

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