दीवाना – डी के निवातिया

दीवाना___मै दीवाना, तेरी कातिल अदाओ पे मरने आ गयालुटां के जां इस जुर्म का जुर्माना भरने आ गया !!मुहब्बत करते देख जमाने को बाते बहुत बनायीमिटाके खुद को इसमें आज मै भी संवरने आ गया !!सुना है बड़ी मेहर होती है, रब कि इस इबादत मेंमैं नादाँ इस दरिया के हवाले खुद को करने आ गया !महफिले सजती है मयकदे में लेकर जाम तेरे नाम केमै लेकर नशा तेरी आँखों के जाम में उतरने आ गया !!अब वफ़ा मिले मुझको या बेवफाई से हो सामनाइश्क के इस ख्वाबगाह से “धर्म” गुजरने आ गया !!डी के निवातिया

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 21/07/2018
  2. C.M. Sharma 23/07/2018
  3. ANU MAHESHWARI 23/07/2018
  4. Dr Swati Gupta 23/07/2018
  5. Bhawana Kumari 25/07/2018

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