नर और नारी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

नर और नारी एक समानाये सारी  दुनिया ने  जाना।एक सिक्के के दो पहलू हैंकितना इनमें ताना बाना।जैसे अंबर इस धरती परउदक आग हैं दोनो लड़ते ।सच और झूठ का है खेलासुख हंसते हैं दुख तड़पते ।ममता – माया की है मेलामजहब जाती का है खेलाऊँच – नीच का ध्यान नहीं हैकहाँ रहे अब गुरु वो चेला।दुनिया है अमीर गरीब सेरहते सब अपने नसीब से।बड़े छोटे का क्या है कहनाकभी भाई कभी है बहना।नरम कठोर ठंढ़ा गरम हैस्त्री पुरुष लिंग भ्रम है मन काहार जीत का क्या है कहनानर नारी भूखा है धन का।

  • बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)बाढ़ – पटना

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7 Comments

  1. डी. के. निवातिया 21/07/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 21/07/2018
  3. Shishir "Madhukar" 21/07/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 22/07/2018
  5. C.M. Sharma 23/07/2018
  6. Dr Swati Gupta 23/07/2018
  7. Bhawana Kumari 26/07/2018

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