छोड़ देता है

छोड़ देता है हो सफ़र सुहाना खिलखिलाना भाता है बहुत टूट जाना खा़बों का हौंसले तोड़ देता है मंज़िलों को पा जाना न मुमकिन तो नहीं रासता मुश्किल हो बहुत तो राहें मोड़ देता है न मिले भरोसा तेरा तो इन्सान क्या करे भरी बहारों में भी वो आशा छोड़ देता है मायूसियाँ बढ़ जाती हैंकभी इस क़दरसमय से पहले ही वो दम तोड़ देता है जब मिल जाता है सहारा तेरा तेरे चरणों में ही फिरवो सब छोड़ देता है

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8 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 20/07/2018
    • kiran kapur gulati 20/07/2018
  2. डी. के. निवातिया 20/07/2018
    • kiran kapur gulati 20/07/2018
  3. Shishir "Madhukar" 20/07/2018
    • kiran kapur gulati 20/07/2018
  4. Madhu tiwari 20/07/2018
    • kiran kapur gulati 20/07/2018

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