आज फिर गीत गुनगुनाने का मन करता है।

आज फिर गीत गुनगुनाने का मन करता है।आँसुओं को भी गुदगुदाने का मन करता है।गोद में माँ अब सो जाने का मन करता है।आँचल में छिप खिलखिलाने का मन करता है।याद में तेरी खो जाने  का मन करता है।जीवन में फिर मुस्कराने का मन करता है।मचल रही हैं यादों की लहरें अनवरत अबइसी सागर में रम जाने का मन करता है।पंखुरियाँ यादों की अभी तक झरी नहीं हैंजीवन को और महकाने का मन करता है।पंख फैलाये थे जिस ममता के आँगन मेंआज वहीं पर चहचहाने का मन करता है।उठो माँ, अब आँखें खोलकर तो देखो मुझेआज रूठकर छटपटाने का मन करता है।आँसुओं की धार में इक कागज की नाव लेअब बस तुझ तक पहुँच जाने का मन करता है।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 23/07/2018
  2. Dr Swati Gupta 23/07/2018
  3. C.M. Sharma 24/07/2018
  4. Bhawana Kumari 26/07/2018

Leave a Reply