छम छम बरसें

छम छम बरसें छम छम बरसें अँखियाँ मोरी जब २ तुझ से आँख मिलाऊँ है क्या एैसा तेरी नज़र में समझ २मैं समझ न पाऊँ तन मन हो जाए शीतलजो बार २ तेरा नाम दोहराऊँ कहो कान्हाँ राज़ है क्या ख़ुद को भूल चरणों में तेरे रम जाऊँ हो विभोर भीगे ऑंचलरंग में तेरे रंगती जाऊँ है जादू तेरा बड़ा निराला चरणों पे बलिहारी जाऊँ जो मैं चाहूँ पा लूँ तुझको छाया में तेरी सदा रह पाऊँ तेरी तरफ़ कुछ खींचे है मुझको देख देख अति विभोर हो जाऊँ छम छम बरसें अँखियाँ मोरी हल्की सी तेरी झलक जो पाऊँ

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15 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 17/07/2018
    • kiran kapur gulati 17/07/2018
  2. Shishir "Madhukar" 18/07/2018
    • kiran kapur gulati 18/07/2018
  3. ANU MAHESHWARI 18/07/2018
    • kiran kapur gulati 18/07/2018
  4. C.M. Sharma 19/07/2018
    • kiran kapur gulati 19/07/2018
  5. डी. के. निवातिया 19/07/2018
    • kiran kapur gulati 20/07/2018
  6. kiran kapur gulati 19/07/2018
  7. Madhu tiwari 19/07/2018
  8. kiran kapur gulati 20/07/2018
  9. md. juber husain 02/08/2018
  10. Kiran Kapur gulati 01/09/2018

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