कुछ और सब्र कर लो – शिशिर मधुकर

कुछ और सब्र कर लो प्रीतम मैं पास तुम्हारे आऊंगीजिसको पाकर तुम हँस दोगे वो प्रेम सुधा बरसाउंगीमुझको भी एहसास है तुम मेरे बिन कितना तड़पे होतुमको बाहों में भर लूँगी अब और नहीं तड़पाउंगीतुम प्रेम के प्यासे पंछी हो जो इसकी खोज में तरसे हो इंतजार अब ख़त्म हुआ तुम्हें और ना अब तरसाउंगीविरह की अग्नि में जलकर भी तुमने साथ निभाया हैदूर रहुँगी ना तुमसे अब कोई अगन नहीं भड़काउंगीनीरसता जीवन में जैसी भी आज तुम्हारे पसरी हैसंगीत जहन में भर दूँगी वो पायलिया खनकाउंगीशिशिर मधुकर

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10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 18/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2018
  2. kiran kapur gulati 18/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2018
  3. Ram Gop[al Sankhla 18/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2018
  4. C.M. Sharma 19/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/07/2018
  5. Madhu tiwari 19/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2018

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