तुम मुझे चाहो या ना चाहो

क्यों तुम मुझसे रूठी होकसमे खायी थी मैंने भीफिर तुम क्यों झूठी होएक बार आकर देखो तो सहीजो आंसू दिए है तुमनेमेरे आँखों से सूखे या नहींमुझे तो तुम्हे याद करना भीअच्छा लगता हैतुम नफरत करती हो मुझसेतो जाहिर कर दो नाक्यों जी का जंजाल बना रही होदेखो ना कैसे आसमान भी फफक-फफक कर सुबह से रो रहा हैदेखो ना कैसेबूंदो के संगमेरा सब्र भी टपक रहा हैऔर टपक रही है तुम्हारी यादे भीक्यों मेरा इंतजार बढ़ा रही होआना है तो आ भी जाओया जाते-जाते मेरे कब्र पर सजदा कर जाओमैं खुदा से फरियाद कर तुम्हारे लिए ज़न्नत मुकर्रर करूँगामौत के बाद भी मैं तुमसे ही प्यार करूँगातुम मुझे चाहो या ना चाहो–अभिषेक राजहंस

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 16/07/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 16/07/2018
  3. डी. के. निवातिया 16/07/2018

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