ठीक नहीं – डी के निवातिया

ठीक नहीं

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बात दिल की दिल में छुपाना ठीक नहीं !फ़ासले अपनों के बीच बनाना ठीक नहीं !

जिंदगी में रक्खो अपने काम से काम यारो !तांक- झाँक किसी के आशियाना ठीक नहीं !!

रुत के संग मौसम का बदलना अच्छा है !बिन मौसम बरसात का आना ठीक नहीं !!

सावन के मौसम में सुलगते अरमान हो !इस हाल में यारा परदेश जाना ठीक नहीं !!

जिसने कदर न की कभी दिल-ऐ-जज़्बात की !बेदर्दी हमसफ़र लिए आंसू बहाना ठीक नहीं !!

ये अश्क नहीं कतरे है निशानी मेरे जिगर केइन बेशकीमती मोतियों को लुटाना ठीक नहीं !!

बे-वज़ह, बे-वक्त, बेतुकी बाते अक्सर करते है !ऐसे लोगो की सौबत में “धर्म” आना ठीक नहीं !!

 

डी के निवातिया

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10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 14/07/2018
    • डी. के. निवातिया 08/08/2018
  2. Abhishek Rajhans 15/07/2018
    • डी. के. निवातिया 08/08/2018
  3. C.M. Sharma 16/07/2018
    • डी. के. निवातिया 08/08/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 16/07/2018
    • डी. के. निवातिया 08/08/2018
  5. Bhawana Kumari 25/07/2018
    • डी. के. निवातिया 08/08/2018

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